वो सावन के मौसम में झुले लगाना ,
बरसात मे घर के आँगन में नहाना,
ठहरे पानी मे पैरो से लेहरें उठाना,
लेहरों पे छोटी छोटी कशती चलाना,
और साथ बारिश के मिट्टी की खुशबू का आना,
सुबह लेट होने पे बिन साबुन के नहाना,
लन्च ब्रेक मे पेन्डिन्ग होम वर्क निपटाना,
हर गलती पे एक चकाचक बहाना,
मास्टर के आते ही सन्नाटे का छाना,
और घर आते हि जुते और बसता बगाना,
याद आता है,,,,
नम्बर मिलने पर घर पे न बताना,
पापा के आने से पेहले सो जाना,
सुबाह मम्मी मसका लगाना,
और जाते जाते रिपोर्ट कार्ड साइन कराना,
याद आता है,,,,
सौस से ब्रेड पे डिसाइन बनाना
दाल चावल मे खूब चीनी मिलाना
कच्ची अमिया से मुह की मिठास बढाना
दूध पिने मे नखरे दिखना
और मलाई कि मूछों पे खूब इतराना
याद आता है,,,,,
गुड्डे गुड्डियों कि हर रोज़ शादी कराना
घर घर के खेल मे घर ग्रहस्थी चालाना
मौहल्ले कि गलियों मे साइकल फ़िराना
और नेतओ कि फोटो पे दाडी मूछ लगना
याद आता है,,,,

बिलकुल जी ये बचपन है ही ऐसा अलबेला कि उम्रभर याद आता रहता है बहुत सुब्दर रचना है दीपावली की शुभकामनायें
ReplyDeletealthough I am not so old, but still I miss the school days. Your poems are really great.
ReplyDeleteWish you a very happy Deepawali...
if you like.. http://exploring-self.blogspot.com
KACHI PAR ACHHI KAVITA
ReplyDeleteझिलमिलाते दीपो की आभा से प्रकाशित , ये दीपावली आप सभी के घर में धन धान्य सुख समृद्धि और इश्वर के अनंत आर्शीवाद लेकर आये. इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए.."
ReplyDeleteवाह !
ReplyDeleteअच्छी कविता
आपका स्वागत है
आपको और आपके परिवार को दीपोत्सव की
हार्दिक बधाइयां
shyaam 1950 ---ne sahee kahaa.
ReplyDeleteहुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
ReplyDeleteइधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....
http://www.samwaadghar.blogspot.com/
mujhe padhkar achha laga
ReplyDeleteapna bachpan bhee yad aa gaya
badhaee
shashi kumar verma
सभी टिप्पणी कारों का धन्यवाद करता हूँ
ReplyDeletekavita achhi thi par hindi bahaut kharab. matra ki pehchaan sikhne vaapas bachpan mein jao
ReplyDeleteBACHPAN se bachpan ki yaad aa gai.Your poem is very impressive,ican't belive u can write like a real poet.keep it up . Ankita
ReplyDelete